इश्क…

इश्क ने जब-जब दस्तक दी है…….मैने तब-तब दरवाजा बंद रक्खा है

समझो तो, फुर्सत नही अब किसी नए दर्द की……मैने अभी भी पुराने गमो को गले से लगा रक्खा है

बरस हो चले , उतरता ही नही उसका फितूर…..कभी-कभी लगता है उसकी यादो मैने बहुत सर चढा रक्खा है

इत्र की तरह फैली है उसकी खुश्बु मेरी नज्मो मे, बेखबर को मैने जीने का सहारा बना रक्खा है

इश्क ने जब- जब दस्तक दी है, मैने तब- तब दरवाजा बंद रक्खा है

आज सब कह भी दो….

तुमने जो कहा नही, वो सब जो उसने भी अब तक सुना नही…………चलो आज सब कह भी दो

वक्त यूं ही निकल जाएगा सही वक्त के इंतजार मे, मेरी बात मानो इजहार-ए- मोहब्बत कर ही दो………चलो आज सब कह ही दो

फकत सपनो की सोच भर से कुछ नही होने वाला,सुनो आज आँखो-आँखो मे सारी बातें बयां कर ही दो………चलो आज सब कह भी दो

कब तक आहें भरते रहोगे बस उसके दीदार भर से, एक काम करो किसी रोज हाथ पकड कर उसे “गुलाब” दे ही दो..  ….चलो आज सब कह भी दो

याद तो उसे भी आती होगी….

दिल कहता है याद तो उसे भी आती होगी………वो वादे, वो बाते थोडा-थोडा ही सही, कुछ तो उसे सताती होगी…..

मानता हूं तकदीर ने बहुत तोडा है मुझे, यकीन है मेरे हालात पे हंसी तुम्हे भी आती होगी……

अब मै नही तो कोई और सही….पर बस एक बात सताती है, वो उसे क्या कह कर पुकारती होगी……

खिल उठता है मेरा चेहरा वो आगाज याद कर….बस जब बात आए अजांम की तो सोचता हूं, आँखे क्या उसकी भी भर आती होगी……दिल कहता है याद तो उसे भी आती होगी…….

अब मै कहीं नही…..

वो आज भी ख्वाबो मे है मेरे,जिसका अब ख्याल मै नही……..मालूमात है उसकी हर बात मुझे,जिसकी बातो मे जिक् मेरा कहीं नही………….

कई बार लकीरें देखी मैने,मेरा मुकद्दर जानने को……  सब कुछ दिखा मुझे,बस उसका नाम कहीं नही………

हैरान हूँ मै खुद के इतने गम देखकर,पर इनका मुझे कोई गम नही……मै तो वो परवाना हूँ ,जिसे श्मा के अलावा किसी की खबर नही……..

मै अंधेरा हूँ तो अंधेरा ही रहने दो, इस अंधेरे को अब रोशनी के लिए किसी दीपक की आस कहीं नही…

.वो आज भी ख्वाबो मे है,जिसका अब ख्याल मै नही….

तब मेरी याद तो आती होगी??

कभी तो ख्यालो मे कुछ बेचैनी सी रहती होगी, जब मिलती होगी फुरसत…कहो क्या तब मेरी याद आती होगी??

भीड मे निगाह किसी पे तो रूकती होगी, किसी की बातो मे जब मेरी झलक दिखती होगी…..कहो ना तब मेरी याद तो आती होगी????

माना मशरूफ हो अपने ख्यालो मे कहीँ , कई रंग बिखरे पडे है तुम्हारी राह मे कई…..पर जब डुबते होगें अपने ही ख्यालो मे कभी, क्या तब मेरी याद तुम्हे आती होगी????

कब मिले है दो किनारे ये जानती हूँ मै……किसी और के साथ पूरी है तुम्हारी कहानी ये भी मालूम है मुझे…….पर जब जिक् हो कहीँ अधूरी कहानी का, कहो ना तब तुम्हे मेरी याद तो आती होगी?????

मै बिकने को तैयार खडी हूँ……

बेशम् बन के बेबाक खडी हुं…….मै बिकने के लिए तैयार खडी हुं……

निकलूँ जो दिन मे,तो खुद को क्या क्या सुनुँ ……हर कहीँ नीची नजरें और सर झुका कर चलूँ……………जो उजाले मे बेहया कहे,रातो मे उन्के लिए आराम का सामान बन खडी हूँ……देखो मै बिकने को तैयार खडी हूँ……..

बदं दरवाजे है मेरे लिए हर कहीं…..कोई और काम करने की इजाजत मुझे नही……..और भी हुनर बकझे हैं खुदा ने , फिर भी लाश बन कमरे मे पडी हूँ…..मै बिकने को आज तैयार खडी हूँ……

मजबूरी नही देखती, बस हर नजर सवाल करती है……कोई तो पूछो, मै क्यो बिकने को तैयार खडी हूँ????…….