तुम बताना जरूर…… 

जान-ए-हयात ओ आफत-ए-जां, जब कोई पूछे हमारे बारे में तो तुम बताना जरूर……. 

हवा कैसे मेरी जुल्फे उडाया करती थी, कैसे तुम्हारी उंगली उन्हें मेरे कानो के पीछे लाया करती थी……. मुशकिल है जानम, पर जब कोई पूछे हमारे बारे में तो तुम बताना जरूर….

मेरे कंधे पे तेरा हाथ रखना…मेरा तुझे देखकर, फिर कही और देखना.  ….ये सारे किस्से हैं विसाल-ए-इश्क के, इन्हें तुम हिज्र के मौसम में भी याद रखना जरूर…. जब कोई पूछे हमारे बारे में तो तुम बताना जरूर

तेरे लिहाज मे मै ता-उम्र चुप रहूंगी, मेरे भी लिहाज में तुम चुप रहना हूजुर…. जब कोई पूछे मेरे बारे मे कि मैं कौन थी!!!तो दीपक में जलती बाती दिखाना जरूर…… जब कोई पूछे हमारे बारे में तो तुम बताना जरूर

इस उलफत में तकल्लुफ़ कैसी…..दिललगी थी दरमिया सो बीत गई, नफरत होती तो अब तक जिदां रहती जरूर…..मुसलसल बीतते वक्त मे ग़ालिबन मेरा सबकुछ हो तुम, पर अब मै कौन हूँ तुम्हारी!! तुम कभी ये सोचना जरूर…..  जब कोई पूछे हमारे बारे में तो तुम बताना जरूर

                                               गरिमा…. 

दरीचो से लोग झांकते फिरते हैं 

दरीचो (window /खिड़की)  से लोग झांकते फिरते हैं… फिर कहते है, दीवारों के कान होते है….

ना जाने कहाँ से आये हैं!! ये आंखों से चीरते  हैं और बेतुके लतीफो(joke/मजाक) पे हंसते है……. क्या कहा! हम में से है???? चलो मान लेती हूँ…जानवर 4 पैर के ही  नहीं, 2 पैर के भी होते हैं…… 

शब (night/रात ) के साये में निकलते है दरिंदे…… ना नोचते है, ना खाते है , बस आंखों से नंगा करते है….. यूं तो डरती तो कोई भी लडकी नही, बस मुफि्लसी(poverty/गरीबी ) की आड में ये  वर्दी वाले चुप करा दिया करते है….. 

तुम्हे होगा यकीन पर मुझे तो नहीं कि दीवारों के भी कान होते हैं… 

                   गरिमा शर्मा