दरीचो से लोग झांकते फिरते हैं 

दरीचो (window /खिड़की)  से लोग झांकते फिरते हैं… फिर कहते है, दीवारों के कान होते है….

ना जाने कहाँ से आये हैं!! ये आंखों से चीरते  हैं और बेतुके लतीफो(joke/मजाक) पे हंसते है……. क्या कहा! हम में से है???? चलो मान लेती हूँ…जानवर 4 पैर के ही  नहीं, 2 पैर के भी होते हैं…… 

शब (night/रात ) के साये में निकलते है दरिंदे…… ना नोचते है, ना खाते है , बस आंखों से नंगा करते है….. यूं तो डरती तो कोई भी लडकी नही, बस मुफि्लसी(poverty/गरीबी ) की आड में ये  वर्दी वाले चुप करा दिया करते है….. 

तुम्हे होगा यकीन पर मुझे तो नहीं कि दीवारों के भी कान होते हैं… 

                   गरिमा शर्मा 

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